(N/A) जब जीवाश्म ईंधन जलाए जाते हैं,तो पृथ्वी के क्षोभमंडल (troposphere) में विभिन्न प्रदूषक उत्सर्जित होते हैं। हाइड्रोकार्बन और नाइट्रिक ऑक्साइड $(NO)$ जैसे मुख्य प्रदूषक पर्याप्त उच्च स्तर तक जमा हो जाते हैं।
सूर्य के प्रकाश के साथ उनकी परस्पर क्रिया से एक श्रृंखला अभिक्रिया होती है जिसमें $NO$ नाइट्रोजन डाइऑक्साइड $(NO_2)$ में परिवर्तित हो जाता है। यह $NO_2$ सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा अवशोषित करता है और नाइट्रिक ऑक्साइड तथा मुक्त ऑक्सीजन परमाणु में टूट जाता है।
$NO_{2(g)} \stackrel{h\nu}{\longrightarrow} NO_{(g)} + O_{(g)}$ $(I)$
ऑक्सीजन परमाणु बहुत अधिक अभिक्रियाशील होते हैं और हवा में मौजूद $O_2$ के साथ मिलकर ओजोन का उत्पादन करते हैं।
$O_{(g)} + O_{2(g)} \rightleftharpoons O_{3(g)}$ $(II)$
उपरोक्त अभिक्रिया $(II)$ में निर्मित ओजोन,अभिक्रिया $(I)$ में निर्मित $NO_{(g)}$ के साथ तेजी से अभिक्रिया करके $NO_2$ को पुनर्जीवित करती है। $NO_2$ एक भूरी गैस है और पर्याप्त उच्च स्तर पर यह धुंध में योगदान दे सकती है।
$NO_{(g)} + O_{3(g)} \rightarrow NO_{2(g)} + O_{2(g)}$ $(III)$
ओजोन एक जहरीली गैस है और $NO_2$ तथा $O_3$ दोनों ही शक्तिशाली ऑक्सीकरण एजेंट हैं,जो प्रदूषित हवा में मौजूद बिना जले हाइड्रोकार्बन के साथ अभिक्रिया करके फॉर्मेल्डिहाइड $(HCHO)$,एक्रोलिन $(CH_2=CHCHO)$ और पेरोक्सीएसिटाइल नाइट्रेट $(PAN)$ जैसे रसायन उत्पन्न कर सकते हैं।